अंतरिक्ष में एलियंस के सामान? Aliens Ke Saboot

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Antriksh mein aliens ke saboot? रात के अंधेरे में आसमान की ओर चमकते अनगिनत तारों को देखकर हमारे मन में एक ख्याल आता है कि क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं, क्या इन लाखों तारों और ग्रहों में से एक भी ऐसा नहीं है जिसमें पृथ्वी जैसा हो?

एक पल के लिए यह मान लिया जाये कि इस ब्रह्माण्ड में केवल एक ही पृथ्वी है जहाँ जीवन है, तब भी मानव मन इस बात को स्वीकार नहीं करता है और फिर वह सोचता है कि यदि जीवन वास्तव में केवल पृथ्वी पर ही है, तो इन लाखों करोड़ों चमकते तारों का क्या मतलब है?

दोस्तों यही वो सवाल हैं, जिनको जानने के लिए इंसान लगातार मेहनत कर रहे हैं, और अभी तक अरबों डॉलर खर्च भी कर चुके हैं। स्पेस यानि अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे ग्रह पर ज़िन्दगी पायी जाती है या नहीं, और अगर पायी जाती है तो वो एलियंस दिखते कैसे हैं? और कैसे अपनी ज़िन्दगी बिताते हैं? नासा ने यह पता लगाने के लिए सबसे पहले चंद्रमा पर जाने का फैसला किया कि अंतरिक्ष में अन्य ग्रहों के अंदर जीवन है या नहीं।

चाँद पर एलियंस के सबूत?

क्योंकि चंद्रमा एकमात्र ऐसा उपग्रह था जो 384,000 किमी दूर पृथ्वी के सबसे करीब था, इसलिए सबसे पहले एक अंतरिक्ष यान 1968 में चंद्रमा पर भेजा गया। इस अंतरिक्ष यान का नाम था अपोलो 8 और इसका मिशन था चाँद का एक चक्कर लगाकर वापस आना। अपोलो 8 में तीन अंतरिक्ष यात्री थे, जिन्हें चंद्रमा के करीब पहुंचने में 68 घंटे लगे।

इस मिशन में उन्हें कोई अजीब चीज़ तो नहीं दिखी पर ये तीन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी को ऊपर उगते हुए देखने वाले पहले इंसान थे। यानी जिस तरह हम सूर्यास्त और सूर्योदय देखते हैं, उन्होंने पृथ्वी को उगते हुए देखा, और इस खूबसूरत दृश्य की तस्वीर भी पहली बार अपोलो 8 ने ली थी।

इस मिशन के अगले ही साल यानी जुलाई 1969 में नासा का अंतरिक्ष यान अपोलो 11 पहली बार चन्द्रमा पर उतरा और कमांडर नील आर्मस्ट्रांग पहला आदमी था जिसने चाँद पर क़दम रखा। अलबरने और नील आर्मस्ट्रांग ने चाँद पर 2 घंटे 15 मिनट तक मून वाक किये और वहां के मिट्टी के नमूने लेकर वापस पृथ्वी के तरफ रवाना हुए।

नासा का कहना है कि चूंकि चंद्रमा पर हवा और ऑक्सीजन नहीं है, इसलिए आज वहां अंतरिक्ष यात्रियों के जूते के निशान हैं। नासा के चंद्र मिशन के दौरान किसी ने भी एलियंस को नहीं देखा। लेकिन चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले उपग्रह जो लगातार हमें चंद्रमा की तस्वीरें भेजते हैं, उन्होंने काफी कुछ देखा है।

एलियन रिसर्चर का का क्या मानना है? Antriksh mein aliens ke saboot

एलियन रिसर्चर स्कॉट सी वेरिंग का मानना है कि नासा द्वारा भेजे गए चाँद के ऐसे कई फोटो हैं जहां भूमिगत एलियंस होने की आशंका है, नासा द्वारा प्रकाशित चंद्रमा की तस्वीरों में उन्होंने एक ऐसे जगह की पहचान की है, जिसमें एक अजीब प्रकार की इमारत दिखाई दे रही थी।

स्कॉट का मानना ​​​​है कि यह वस्तु चंद्रमा पर दिखने वाली हर चीज से काफी अलग है और यह किसी भी तरह से सामान्य नहीं लगती। जब स्कॉट ने अपना शोध प्रकाशित किया, तो जो हुआ उस पर विश्वास करना मुश्किल था।

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कुछ ही दिनों बाद जब नासा ने चाँद के फोटो अपडेट की तो, वह इमारत जैसी वस्तु वहां से गायब हो गई थी, तो स्कॉट का मानना ​​है कि अगर चंद्रमा पर कोई गतिविधि नहीं है, तो यह इमारत जैसी वस्तु यहां से कैसे गायब हो गई? या तो नासा ने इस चीज़ को एडिट करके छिपा दिया या क्या वास्तव में चंद्रमा पर कोई एलियन गतिविधि हो रही है?

यह केवल कुछ तस्वीरों में देखी गई संरचनाओं के बारे में ही नहीं है। वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के अंधेरे हिस्से पर एक विशाल क्षेत्र की खोज की है, यानी वह हिस्सा जिसे हम पृथ्वी से नहीं देख सकते हैं, जी हाँ वही हिस्सा जहाँ अभी हाल ही में चंद्रयान 3 इसरो द्वारा उतारा गया, ऐसा पाया गया है जो चांद के बाकी हिस्सों से काफी अलग है। पहली नजर में तो ये इलाका सिर्फ थोड़ा अलग ही लग रहा था लेकिन रिसर्च के बाद जो मिला वो और भी आश्चर्यजनक था।

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि चांद का ये हिस्सा 43,000 वर्ग किलोमीटर बड़ा है। और यह नील आर्मस्ट्रांग द्वारा लाई गई मिट्टी से नहीं बना है, बल्कि यह एक धातु से बना है। वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि लगभग 400 अरब साल पहले एक बहुत बड़ा उल्का पिंड चंद्रमा से टकराया था, जिसके कारण यह धातु चाँद पर बची हुई है।

लेकिन कई शोधकर्ता इस बात पर विश्वास नहीं करते क्योंकि अगर इतना बड़ा उल्का पिंड चंद्रमा से टकराता, तो चंद्रमा दो टुकड़ों में टूट जाता। उनका मानना ​​है कि धातु से बना चंद्रमा का यह हिस्सा यहां भूमिगत एलियन सभ्यता की भी एक संकेत हो सकती है।

मंगल ग्रह पर एलियंस के सामान के सबूत?

चंद्रमा से परे, अगर हम मंगल ग्रह की बात करें, तो अब तक हम मंगल पर 21 रोबोट भेज चुके हैं। मंगल, जिसे रेड प्लेनेट भी कहा जाता है, पृथ्वी से लगभग 40 करोड़ किलोमीटर दूर है, लेकिन सूर्य की परिक्रमा करने के दरमियान हर दो साल के बाद एक दिन ऐसा आता है जब मंगल ग्रह पृथ्वी के काफी करीब आ जाता है और उस दिन यह दूरी केवल 6 करोड़ 20 लाख किमी रह जाती है। यह दूरी पृथ्वी से इतनी भी कम नहीं होती है।

Earth से Mars तक अभी तक जितने भी रोबोट भेजे गए हैं, सभी रोबोट को वहां पहुंचने में सात महीने लग गए। मंगल ग्रह पर भेजी गई 21 रोबोट में से 17 लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गई हैं, जबकि केवल चार ही वहां सफलतापूर्वक उतरे हैं। उतर चुके रोबोट अभी भी मिशन पर हैं। इन रोबोटों ने अब तक हमें मंगल ग्रह की जो तस्वीरें भेजी हैं, उनमें कई अजीब वस्तुएं देखी गई हैं।

एलियन रिसर्चर स्कॉट का कहना है कि अभी तक मंगल ग्रह से जो भी प्रमाण मिले हैं, उसके बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि मंगल ग्रह पर भी जीवन पाया जाता है। उन्होंने कहा कि मंगल की तस्वीरों में उन्हें छोटे-छोटे पिरामिड दिखे हैं। वो पिरामिड जिनके वजह से पृथ्वी पर ही लोग आश्चर्यचकित होते हैं, मंगल ग्रह पर भी देखे गए हैं।

मंगल ग्रह पर क्यूरियोसिटी रोवर द्वारा ली गई एक तस्वीर में कई चट्टानें देखी जा सकती हैं, लेकिन चट्टानों में से एक बिलकुल अपने पिरामिड जैसी आकृति दिखी है। देखने से ऐसा लगता है कि किसी ने ख़ास करके यह छोटा सा पिरामिड यहां बनाया गया है। लेकिन किसने? स्कॉट का मानना है कि मंगल पर कम ऊंचाई के एलियंस हैं, जिन्होंने छोटे-छोटे पिरामिड बनायीं है।

Antriksh mein aliens ke saboot

क्यूरोसिटी रोवर जिसको बनाने में नासा को 20 अरब डॉलर खर्च हुए थे, उसने मंगल पर लैंडिंग के बाद हजारों तस्वीरें भेजी हैं। ज्यादातर तस्वीरों में सिर्फ चट्टानें और पहाड़ ही दिख रहे हैं, लेकिन कुछ तस्वीरें ऐसी भी हैं जिन्होंने इंटरनेट पर काफी सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि इनमें जरूर कुछ असामान्य है।

इन फोटो में से सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध होने वाली फोटो 1976 में वाइकिंग-1 द्वारा खींची गई थी। जिसमें मंगल ग्रह पर एक विशाल चेहरा देखा गया है। या तो यह एक संयोग है या जैसे प्राचीन मिस्रवासी विशाल मूर्तियाँ बनाते थे, वैसे ही एलियंस ने भी इस स्मारकीय मूर्ति को मंगल ग्रह पर बना रखा था। नासा का कहना है कि यह तस्वीर एक विशाल पर्वत की है, जो इस पर पड़ने वाली रोशनी और इस पर बनने वाली छाया के कारण इसका आकार ऐसा दिख रहा है।

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2014 में क्यूरोसिटी द्वारा एक और फोटो ने हलचल मचा दी, जिसमें मंगल ग्रह पर एक हड्डी पड़ी दिखाई दी। इस हड्डी को देख कर ऐसा लगता है जैसे किसी छोटे कद के एलियन की बहुत पुरानी हड्डी हो। नासा के मुताबिक यह कोई हड्डी नहीं बल्कि यह एक पत्थर है, जिसकी आकृति तेज़ हवाओं के वजह से ऐसी हो चुकी है। मान लीजिए कि यह हड्डी नहीं है, लेकिन मार्च 2016 की एक तस्वीर में एक पूरी खोपड़ी भी नजर आ आयी।

जैसे ही यह तस्वीर जारी हुई, इंटरनेट इस पर एक नई चर्चा शुरू हो गई। एलियन researcher का पूरा यक़ीन है कि मंगल ग्रह पर जरूर कुछ गड़बड़ है, या तो यहां एलियंस की बस्ती है या यहां हुआ करती थी, और ये बात नासा के शोध से भी साबित हो चुकी है कि मंगल ग्रह पर कभी जीवन था।

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अभी ये बातें चल ही रही थी कि मंगल ग्रह पर क्यूरियोसिटी रोवर की एक और फोटो ने धूम मचा दी। इस फोटो में एक चट्टान दिखी जो पृथ्वी पर मछली की तरह दिख रही थी। मंगल ग्रह पर कई किलोमीटर दूर रोवर्स की मदद से जो जानकारी मिल रही है, उसमें यह साबित हो गया है कि तीन अरब साल पहले मंगल ग्रह पृथ्वी जितना हरा-भरा हुआ करता था और वहां बड़े महासागरों के संकेत भी मिले हैं और यह भी माना जाता है कि ये महासागर अभी भी मंगल की सतह के नीचे जमे हुए हैं। जिस पर और शोध किया जा रहा है।

2014 में मार्स रोवर ने रात के वक़्त की एक फोटो भेजी जिसको देखकर मंगल पर एलियंस की बात से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इस तस्वीर में एक चट्टान के अंदर से रोशनी आती देखी जा सकती है। इस फोटो के मिलने के बाद एलियन रिसर्चर का कहना है कि यह मार्स पर एलियन या जीता जागता सबूत है। ये तो हम इंसान कह रहे हैं कि मंगल ग्रह एक बंजर ग्रह है।

असल सच्चाई क्या है? हमारे लिए ये जानना शायद बहुत मुश्किल है। मंगल ग्रह पर कई ऐसी फोटो मिले हैं जिनमें मूर्ति देखि जा सकती हैं। 2018 में कैप्चर की गई इस फोटो में चट्टानें पर बनी हुई मूर्ति जैसा देखा गया था जबकि 2015 की फोटो में दूर पहाड़ पर एक महिला की मूर्ति भी देखी गई थी।

एलियन रिसर्चर स्कॉट का मानना ​​है कि मंगल ग्रह पर एलियंस हमसे अधिक उन्नत हैं क्योंकि एक तस्वीर में उन्होंने मंगल ग्रह पर एक इंजन देखा है जिसके ऊपर मिट्टी की एक परत है जिसके वजह से यह दूसरे पत्थर के रंग जैसा दिख रहा है। या तो यह इंजन मंगल गृह का ही है या किसी स्पेस शिप का टुटा हुआ हिस्सा, या तो यह एक पत्थर से ज्यादा कुछ नहीं है।

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निचोड़

अगर मेरी राय मानें तो सिर्फ एलियंस की खोज या दूसरे ग्रह को अपना घर बनाने के मकसद से स्पेस रिसर्च पर इतना खर्च करना बेवकूफी और फ़िज़ूल खर्ची के अलावा कुछ नहीं है। ईश्वर ने हमें इतनी अच्छी पृथ्वी दी है, इस घर को छोड़ कर दूसरा घर ढूंढने के लिए अरबों डॉलर खर्च और पृथ्वी को राकेट ईंधन से प्रदूषित करने से बेहतर होगा की यही अरबों डॉलर पैसा पृथ्वी के पर्यावरण को पुनः सही करने में लगाया जाए।

अफ्रीका के बहुत सारे ऐसे देश हैं जहाँ लोग बच्चे भूख से मर रहे हैं, उनके पास दो वक़्त का खान तक नहीं है, और एलोन मस्क और दूसरे स्पेस संस्थान अरबों-खरबों डॉलर दूसरा घर ढूंढने और एलियंस की खोज में लूटा रहे हैं। इसे कहाँ से सही कहा जा सकता है?

अब रही बात के वाक़ई में एलियंस हैं या नहीं? अभी तक जो भी एलियंस के बारे में प्रमाण दिए जाते हैं सब के सब संदिग्ध यानि doubtful हैं। ज़्यादातर एलियंस की कहानियां मनोरंजन के लिए बनायीं जाती हैं। अब रही बात एलियन एक्सपर्ट की, तो ये एक्सपर्ट ही है एलियन के तब ज़ाहिर सी बात है ये कुछ न कुछ रोचक कहानी बनाएंगे ही, वरना इनकी करियर भी खत्म हो सकती है।

उम्मीद है मेरा पोस्ट Antriksh mein aliens ke saboot? आपको पसंद आया होगा, अपनी राय या सवाल नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं, आगे भी शेयर करिये, मिलते हैं अगले पोस्ट में, अपना ख़याल रखिये शुक्रिया!

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