मोबाइल फोन के नुकसान और बचाव | पूरी जानकारी

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हर तकनीक के फायदे और नुक्सान दोनों हैं, वो कहते हैं न “Excess of everything is bad” यानि कोई भी चीज़ ज़्यादा होने पे नुकसान करती है, ठीक उसी तरह मोबाइल फोन का ज़्यादा उपयोग नुकसान करता है। ख़ास कर के बच्चों पर मोबाइल का बहुत बुरा असर होता है। तो आइये आसान भाषा में Mobile Phone के नुकसान को जानते हैं।

आजकल मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर, लैपटॉप इत्यादि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हमारे जीवन के अभिन्न अंग बन चुके हैं, क्यूंकि ये हमारे काम को आसान बनाते हैं। मोबाइल फोन के बिना तो जैसे कोई काम ही नहीं हो पता। चाहे वो किसी से बात करना हो, कोई ऑनलाइन क्लास करनी हो, Internet से किसी APP (ऐप) के ज़रिये खाना आर्डर करना हो या कोई Payment पेमेंट करना हो। सारे काम Mobile Phone के ज़रिये आसानी से हो जाते है।

Mobile Phone के वजह से ध्यान भटकना

मोबाइल के ज़्यादा इस्तेमाल से दिल का, मस्तिष्क का रोग, और ट्यूमर जैसे घातक रोग हो सकते हैं, यही नहीं बल्कि मोबाइल फोन के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण हमारे डीएनए सेल को Nuksan (नुकसान) पहुंचा सकते हैं।

Mobile Phone बहुत ज़्यादा ध्यान भटकाने का काम करता है, चाहे वो सोशल मीडिया नोटिफिकेशन हो, या ईमेल, कॉल, या फिर मैसेज हो। बारी-बारी से इतनी ज्ञान और सूचना की चीज़ें किसी भी काम में फोकस करने में बाधा डालती हैं।

स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

मोबाइल के ज़्यादा उपयोग से आंखों में तनाव, गर्दन और पीठ की समस्याएं (खराब पोस्चर में बैठने से), और बार-बार होने वाली स्ट्रेन इंज्युरी (जैसे कार्पल टनल सिंड्रोम) जैसी शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। मोबाइल से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी विकिरण से भी स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।

समाधानविस्तार से
20-20-20 नियमहर 20 मिनट पर 20 फ़ीट देखते हुए 20 बार पलक झपकाना
अच्छा खान पानहरी सब्ज़ी, फल और मछली, बादाम वगैरह खाना
Anti-Glare Glass (एंटी ग्लेर) चश्माMobile Phone उपयोग करते वक़्त एंटी ग्लेर चश्मा लगाना
Mobile se aankho ko kaise bachaye के लिए टेबल

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मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

Mobile Phone के ज़्यादा उपयोग से anxiety, चिंता और अकेलेपन के स्तर बढ़ रहे हैं। लगातार मैसेज और सोशल मीडिया पोस्ट को चेक करते रहने से नौजवानों में FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट) यानि ऐसा सोचना कि दूसरे लोग अच्छा जीवन जी रहे हैं, या उनकी लाइफ ज़्यादा मस्ती वाली है। जिससे ईर्ष्या और जलन की भावना और आत्म-सम्मान में कमी आ रही है।

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नींद में खलल तथा इंटरएक्शन या बात चीत में परेशानी

मोबाइल उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन के उत्पादन को बाधित कर सकती है, यह एक हार्मोन है जो नींद को कंट्रोल करता है। सोने से पहले इन Devices उपकरणों का उपयोग करने से नींद की गुणवत्ता और मात्रा में बाधा आती है।

Phone का अत्यधिक उपयोग संभावित रूप से आमने-सामने की सामाजिक बातचीत को प्रभावित कर सकता है और विशेष रूप से युवा उपयोगकर्ताओं के बीच Social skills and interaction के विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

Privacy प्राइवेसी समस्या तथा लत और निर्भरता

मोबाइल बड़ी मात्रा में personal यानि व्यक्तिगत डेटा जमा कर सकते हैं, जो गोपनीयता संबंधी चिंता का विषय हो सकता है। इसके अतिरिक्त, इससे हैकिंग और डेटा चोरी होने की भी सम्भावना रहती है।

Online (ऑनलाइन) की दुनियां में आजकल सारे ज़रुरत के काम मोबाइल से हीं हो रहे हैं। चाहे वो राशन का सामान या कुछ भी आर्डर करना हो, ऑनलाइन पढ़ाई करनी हो, सरकारी विभाग का काम हो, कोई मनोरंजक वीडियो देखना हो या फिर ऑनलाइन पैसा कमाना हो। ऐसे में इसकी लत लग सकती है, जिससे लोग पूरी तरह से इसपर निर्भर हो सकते हैं, जिसे तोड़ना मुश्किल हो सकता है। यह विशेष रूप से युवा उपयोगकर्ताओं के लिए चिंता का विषय है, जो अपने मोबाइल पर समय बिताने में अन्य महत्वपूर्ण कामों को छोड़ देते हैं।

पर्यावरण पर प्रभाव और फ़िज़ूल खर्ची

Mobile उपकरणों के उत्पादन, उपयोग और निपटान यानि disposal से हमारे पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। इसके उत्पादन के लिए दुर्लभ खनिजों का निष्कर्षण, प्रोडक्शन यानि निर्माण के दौरान ऊर्जा का उपयोग और उनके निपटान के दौरान Electronic Waste इलेक्ट्रॉनिक कचरा होता है, जो हमारे प्रकृति के लिए अच्छा नहीं है।

Mobile Phone काफी महंगे होते हैं। खरीदने के वक़्त आपका पैसा खर्च होता है, इसके अलावा Data Plan डेटा प्लान, ऐप्स के अलग खर्च होते हैं। फिर समय-समय पर कंपनी द्वारा 3G के बाद 4G और उसके बाद 5G, जिसके वजह से आपको मोबाइल भी इसके अनुसार नया खरीदने पर ज़ोर दिया जाता है। ये सब कंपनी की मिली भगत होती है जिसे उपभोक्ता भोगती है।

मोबाइल फोन के नुकसान को समझने के लिए video

बच्चों को गलत आदत लगना

हम सभी जानते हैं कि internet की इस दुनियां में क्या-क्या हो रहा है। अच्छी और बुरी दोनों चीज़ें इंटरनेट यानि mobile phone पर मौजूद हैं। बच्चों को क्या देखना चाहिए और क्या नहीं ये सभी माता पिता को पता होनी चाहिए। इंटरनेट पर हर जगह अश्लीलता फ़ैल रही है, चाहे वो यूट्यूब ऐड हों या इंस्टाग्राम और फेसबुक।

यूट्यूब में आप age restriction सेटिंग करके कुछ हद तक इसको कंट्रोल कर सकते हैं। क्यूंकि इस सेटिंग से अश्लील चीज़ें काफी हद तक आपके यूट्यूब अकाउंट में नहीं दिखाई जाएगी। लेकिन फिर भी बच्चों को जब भी मोबाइल दें तो अपनी निगरानी में दें, क्यूंकि कम उम्र में बच्चों को बिगड़ने के ज़्यादा मौके होते हैं।

निचोड़

Mobile Phone Ke Nuksan को इसके सावधानीपूर्वक इस्तेमाल और कुछ टिप्स को अपनाने से कम किया जा सकता है, जैसे Screen On स्क्रीन ऑन टाइम को कम करके, नीली रोशनी के जोखिम को कम करने के लिए ‘नाइट मोड’ का उपयोग करके, उपयोग करते वक़्त सीधे सही अवस्था यानि पोस्चर में बैठना, नियमित रूप से प्राइवेसी सेटिंग को देखना और फेस-टू-फेस सामाजिक इंटरएक्शन के लिए समय निकालना।

आशा करता हूँ मेरी दी हुई जानकारी आपके और आपके चाहने वालों के लिए फायदेमंद होगी, इस लेख को सोशल मीडिया पर अपनों को भी शेयर करिये, मिलते हैं अगले लेख में शुक्रिया!

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FAQ

फोन से क्या क्या बीमारी होती है?

मोबाइल फोन के ज़्यादा इस्तेमाल से माईग्रेन, ब्रेन ट्यूमर या ब्रेन हेमरेज, आँखों का कमज़ोर हो जाना जैसी बीमारी होने की सम्भावना होती है।

1 दिन में कितने घंटे फोन चलाना चाहिए?

1 दिन में एक व्यक्ति को 1-2 घंटे हीं mobile phone (मोबाइल फोन) चलाना चाहिए, क्यूंकि इससे ज़्यादा चलाने पर सर दर्द और आँखों में तनाव की शिकायत होती है।

मोबाइल की लत को कैसे छोड़े?

#1 घर पे रहते वक़्त फैमिली को समय दें।

#2 मोबाइल फोन चलाने का भी समय तय करें।

#3 सोशल मीडिया से दूरी बनायें।

#4 मनोरंजन के लिए किताबें पढ़ें।

#5 दोस्तों से मिलें और उन्हें भी मोबाइल के नुकसान के बारे में बताएं।

#6 अच्छे संगत में बैठें और सामाजिक बनें।

#7 खेल-कूद एक्टिविटी में हिस्सा लें।

बच्चे मोबाइल मांगे तो क्या करना चाहिए?

जब बच्चे मोबाइल मांगें तो कोशिश करें कि उन्हें न दें, ज़्यादा-से-ज़्यादा उन्हें आउटडोर यानि बाहर के खेल-कूद में हिस्सा लेने को मोटीवेट करें। बागबानी, साइकिल चलाना, दौड़, फुटबॉल, क्रिकेट जैसे खेल उनके सेहत के लिए बहुत सही हैं।

किस उम्र में बच्चे को फोन लेना चाहिए?

ये फैसला आपके बच्चे के परिपक़्वता यानि मैचुरिटी पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पे 13 साल की उम्र में बच्चे को मोबाइल दे सकते हैं, लेकिन हाँ फिर भी आपको अपने बच्चे पर ध्यान रखनी है कि वो मोबाइल से क्या-क्या कर रहा है।

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